Tuesday, November 18, 2025

کچھ سمجھ کر ہی ہوا ہوں موجِ دریا کا حریف ورنہ میں بھی جانتا ہوں عافیت ساحل میں ہے

کچھ سمجھ کر ہی ہوا ہوں موجِ دریا کا حریف

ورنہ میں بھی جانتا ہوں عافیت ساحل میں ہے

میرے چہرے سے نہ اندازہ لگانا کہ یہ عمر مجھ پہ بیتی ہے بہت، میں نے گزاری کم ہے! -

میرے چہرے سے نہ اندازہ لگانا کہ یہ عمر

مجھ پہ بیتی ہے بہت، میں نے گزاری کم ہے!

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میں پہاڑوں کی چوٹیوں پر "خاموشی" لکھ آیا ہو


میں پہاڑوں کی چوٹیوں پر
"خاموشی" لکھ آیا ہوں 
وہ خاموشی 
جو ساعتوں کے پردے  میں 
زمین و آسمان کی پرتوں میں 
روح کی گہرائیوں 
غاروں اور کھائیوں میں گونجتی ہے
پہاڑوں کی بلندیاں 
اور ان دیکھی گہرائیاں 
اس کی زبان سے واقف ہیں 
خاموشی!!!
کہاں سے شروع ہوتی ہے؟
کہاں ختم؟
کب سے سلسلہ در سلسلہ 
نسل در نسل
پرت در پرت ہمارے ساتھ ہے
کب تک رہے گی؟
فہم و ادراک سے ماورا 
کئی سوال ہیں 
ان گنت زاویے ہیں 
خاموشی کا معنی اور زبان
صرف خاموشی ہے
اس لئے
پہاڑوں کی چوٹیوں پر
"خاموشی" لکھ آیا ہوں

Friday, September 6, 2024

حلال رشتے کے انتظار میں بیٹھی بوڑھی ہوتی عورت کی فریاد

حلال رشتے کے انتظار میں بیٹھی بوڑھی ہوتی عورت کی فریاد:
میری عمر اس وقت 35 سال ہے میری ابھی تک شادی نہیں ہوئی کیونکہ ہمارے خاندان کی رسم ہے کہ خاندان سے باہر رشتہ کرنا نیچ حرکت ہے ۔خاندان کے بڑے بوڑھے جب آپس میں بیٹھتے ہیں تو بڑے فخریہ انداز سے کہتے ہیں کہ سات پشتوں سے اب تک ہم نے کبھی خاندان سے باہر رشتہ نہیں کیا ۔
عمر کے 35ویں سال میں پہنچی ہوں اب تک میرے لئے خاندان سے کوئی رشتہ نہیں آیا جب کہ غیر خاندانوں سے کئ ایک رشتے آئے  لیکن مجال ہے کہ میرے والدین یا بھائیوں نے کسی سے ہاں بھی کیا ہو۔
میرے دلی جذبات کبھی اس حدتک چلے جاتے ہیں کہ میں راتوں میں چیخ چیخ کر آسمانوں سر پر اٹھاؤں اور دھاڑیں مار مار کر والدین سے کہوں کہ میرا گزارہ نہیں ہورہا خدارا میری شادی کرادیں اگرچہ کسی کالے کلوٹے چور سے ہی صحیح ۔لیکن حیاء اور شرم کی وجہ چپ ہوجاتی ہیں۔
 میں اندر سے گھٹ گھٹ کر زندہ نعش (لاش) بن گئی ہوں ۔
شادی بیاہ وتقریبات میں جب اپنی ہمچولیوں کو اُن کے شوہروں کے ساتھ ہنستے مسکراتے دیکھتی ہوں تو دل سے دردوں کی ٹیسیں اٹھتی ہیں۔۔۔۔۔۔ یا خدا ایسے پڑھے لکھے جاہل ماں باپ کسی کو نہ دینا جو اپنی خاندان کے ریت ورسم کو نبھاکر اپنی بچوں کی زندگیاں برباد کردیں ۔
کبھی خیال آتا ہے کہ گھر سے بھاگ کر کسی کےساتھ منہ کالا کرکے واپس آکر والدین کے سامنے کھڑی ہوجاؤں کہ لو اب اچھی طرح نبھاؤ اپنے سات پشتوں کا رسم ۔
کبھی خیال آتا ہے ہے کہ گھر سے بھاگ جاؤں اور کسی سے کہوں مجھے بیوی بنالو لیکن پھر خیال آتا ہے اگر کسی برے انسان کے ہتھے چڑھ گئی تو میرا کیا بنے گا ۔

میرے درد کو  مسجد  کا مولوی صاحب بھی جمعہ کے خطبے میں بیان نہیں کرتا ۔۔۔۔

 اے حاکمِ وقت، 
اے میرے ابا حضور،
 اے میرے ملک کے مفتی اعظم،
 اے میرے محلے کی مسجد کے امام صاحب ،
اے میرے شہر کے پیر صاحب میں کس کے ہاتھوں اپنا لہو تلاش کروں ؟

کون میرے درد کو سمجھے گا؟ 

میری 35 سال کی عمر گزر گئی لیکن میرے ابا کا اب بھی وہی رٹ ہے کہ میں اپنی بچی کی شادی خاندان سے باہر ہرگز نہیں کروں گا ۔
۔
اے خدا تو گواہ رہنا بے شک تونے میرے لئے بہت سے اچھے رشتے بھیجے لیکن میرے گھروالوں نے وہ رشتے خود ہی ٹھکرا دیئے اب کچھ سال بعد میرا ابا تسبیح پکڑ کر یہی کہے گا کہ بچی کا نصیب ہی ایسا تھا ۔
اے لوگو مجھے بتاؤ کوئی شخص تیار کھانا نہ کھائے اور بولے تقدیر میں ایسا تھا تو وہ پاگل ہے یا عقلمند ۔۔
اللہ پاک نوالے منہ میں ڈلوائے کیا ؟؟؟
یونہی اس مثال کو سامنے رکھ کر سوچیں کہ میرے اور میرے جیسی کئی اوروں کےلئے اللہ نے اچھے رشتے بھیجے لیکن والدین نے یا بعض نے خود ہی ٹھکرا دیئے اب کہتے پھرتے ہیں کہ جی نصیب ہی میں کچھ ایسا تھا۔۔۔

Wednesday, July 17, 2024

मरी छोटी सी गलती ने मेरी जिंदगी बदल दी

मरी छोटी सी गलती ने मेरी जिंदगी बदल दी दो साल पहले में खुशहाल शहजादियों वाली जिंदगी गुज़ार रही थी अचानक मेरी जिंदगी किसी सहरा में भटके मुसाफिर की तरह हो गई जिसे ना रास्ते का पता ना मंजिल का पता दो साल से मैं अपनी आंखों में आंसू लिए बैठी हूं और शायद पूरी जिंदगी बैठी रहूं मैं एक रईस खानदान की लड़की हूं जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी तो मेरी मुलाकात एक फरहान नाम के लड़के से हुई फरहान बहुत हैंडसम और काबिल लड़का था क्लास में किसी को कोई problem होती तो वह फरहान के पास जाता था और फरहान उसकी मदद करता था क्यों के फरहान पढ़ाई मैं बहुत तेज़ और मेहनती था मैं भी छोटी छोटी मदद के बहाने ले कर फरहान के पास जाने लगी फरहान मुझे बहुत अच्छा लगता था फरहान से मेरी दोस्ती हो गई और यह दोस्ती कब प्यार मैं बदल गई पता ही नहीं चला हम एक साल तक Relatioship मैं रहे फरहान मुझसे इतनी मोहब्बत करता था के मैं लफ्ज़ों में बयां नहीं कर सकती एक दिन ऐसा आया के हम दोनों की शादी भी हो गई एक साल बाद अल्लाह ने एक चांद सा बेटा भी नेमत बना कर दे दिया जिसने हमारी जिंदगी को और खुशियों से भर दिया मैं अपने कमरे में बेड पर लेटी हुई थी फरहान कमरे में आए और बोले सुनो फेरिहा मैं दोस्त के यहां जा रहा हूं शाम को आऊंगा अपना खयाल रखना फरहान बहुत जल्दी में थे मेने कहा फरहान क्या हुआ तुम इतने परेशान क्यों हो फरहान ने कहा कुछ नहीं हुआ मेरी जान तुम टेंशन मत लो गाड़ी की चाबी उठाई और चले गए जब शाम को घर वापस आए तो देखा फरहान की व्हाइट शर्ट खून से रंगी हुई थी 
 फरहान को इस हालत में देख कर मैं चिल्ला उठी अल्लाह खेर करे ना जाने फरहान को क्या हुआ मैं डर गई और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी मेने कहा क्या हुआ फरहान तुम ठीक तो हो फरहान ने कहा फेरिहा मैं बिल्कुल ठीक हूं मेरी जान तुम क्यों रो रही हो चुप हो जाओ मेने कहा फिर तुम्हारे कपड़े खून में क्यों रंगे हुए हैं फरहान ने कहा अरे कुछ नहीं रास्ते में एक आदमी की एक्सीडेंट में मौत हो गई है उसे बीच रोड से उठा रहा था तो उसका खून मेरे कपड़ों पर लग गया दुआ करो अल्लाह उसके घर वालों को सबर अता फरमाए मेने कहा अल्लाह खेर करना मैं तो डर ही गई थी मेने अपने शौहर फरहान को गले से लगाया और कहा फरहान जब तुम मेरी आंखों से दूर होते हो मुझे बहुत डर लगता है मैं कहीं तुम्हें खो ना दूं फरहान ने मुझे अपनी बाहों में जकड़ते हुए कहा मेरी जान मेरी फेरिहा में हमेशा तुम्हारे साथ हूं तुम्हें डरने की कोई ज़रूरत नहीं है अच्छा सुनो बहुत तेज़ की भूख लगी है अपने शौहर को खाना तो खिला दो मेने मुस्कुराते हुए कहा जी आप बैठिए मैं अभी लाई अगले दिन सुबह फरहान मेरे पास आए और बोले फेरिहा मैं कल दुबई जा रहा हूं यह सुनकर में चौंक गई मेने कहा क्या बोल रहे हो फरहान दुबई इतनी दूर फरहान ने कहा हां ऑफिस से ऑर्डर आया है कोई अर्जेंट काम है और शायद 1 महीना वहीं रहना पड़ेगा मेने कहा लेकिन फरहान में अकेली केसे रहूंगी फरहान मेरे करीब आए मेरे माथे पर किस किया और बोले सिर्फ एक महीना एडजस्ट करलो मेरी जान बस उनका जान कहना ही मेरी तमाम ख्वाहिशों को पूरा कर देता है मेने मजबूर हो कर फरहान को दुबई जाने दिया अगले दिन फरहान दुबई चले गए 
Mere शौहर फरहान दुबई चले गए एक महीना गुज़र गया था मैं हर रोज़ फरहान से फोन पर बात करती थी मेने फरहान से कहा फरहान एक महीना हो गया है घर वापस कब आओगे तुम्हारा बेटा फवाद तुम्हें मिस कर रहा है पूरे दो साल का हो गया है फरहान ने कहा में भी तुम लोगों को बहुत मिस कर रहा हूं लेकिन फेरिहा sorry में नहीं आ सकता मेरा एक साल का ट्रांसफर यहीं दुबई में ही हो गया है यह सुनकर मैं बहुत रोने लगी यूंही वक्त गुजरता रहा फरहान के जाने के बाद मैं अकेली रहने लगी घर में टाइमपास करने के लिए कुछ काम भी नहीं होता था मेने social media का सहारा लिया social media पर मेरा टाइमपास हो जाता था एक दिन मेरे इंस्टाग्राम पर एक मुरीब नाम के लड़के का मैसेज आया मेने इग्नोर कर दिया वह हर रोज़ मैसेज करने लगा लेकिन मैं उसे इग्नोर करती रही एक दिन मेने परेशान हो कर मूरीब के मैसेज का reply दे दिया यूंही reply करते करते हम दोनों की लंबी बातें होने लगी मूरीब बहुत बड़ा आदमी था उसके करोड़ों के बंगले गाडियां थे वह एक रईस आदमी था वह बहुत खूबसूरत भी था एक दम फिल्मों के हीरो जैसा लगता था हम दोनों ऐसे बात करने लगे जैसे एक एक दूसरे दूसरे को सदियों से जानते हैं उसकी हर एक पसंद चीज़ मेरी पसंद से मैच करती थी मुरीब से बात करते करते कब एक साल बीत गया मुझे पता ही नहीं चला फरहान की अहमियत मेरी नजरों में कम होने लगी फरहान मुझे दुबई से कॉल करते थे लेकिन मैं उनकी कॉल receive नहीं करती थी कोई बहाने बना देती थी एक दिन मुरीब ने मुझसे कहा फेरिहा मेरी ख्वाहिश है के हम दोनों किसी होटल में डिनर करते हैं मेने कहा ठीक है अगले दिन फरहान की कॉल आई फरहान ने कहा फेरिहा में आज घर वापस आ रहा हूं यह सुनकर मैं चौंक गई जहां मुझे फरहान के आने की खुशी होनी चाहिए थी वहां फरहान के आने से डर गई 
एक साल बाद मेरे शौहर फरहान दुबई से घर वापस आए लेकिन मैं उनके आने से खुश नहीं थी क्यों के मुझे मुरीब से मिलना था मुझे किसी तरह फरहान से पीछा छुड़ाना था फरहान मुझसे पहले की तरह मोहब्बत और मेरे लाड उठा रहे थे लेकिन में उनसे दूरी बना रही थी मेरे दिल में मुरीब की मोहब्बत ने जगह बना ली थी फरहान को दुबई से आए दो दिन हो गए थे फरहान ने मुझसे कहा फेरिहा मुझे पानी पिला दो मुझे बहुत गुस्सा आया मेने कहा खुद उठ कर पी लो तुमसे छोटा सा काम भी नहीं होता मैं तुम्हारी नोकर नहीं हूं हद करते हो पूरा दिन फेरिहा यह दे दो फेरिहा वह दे दो तंग आ गई हूं तुमसे तुम्हारे काम करूं या तुम्हारे बेटे के काम करूं मेरे यह अल्फाज़ सुनकर फरहान चौंक गए और कहा क्या हुआ फेरिहा मेरी जान तुम कैसे बात कर रही हो अगर पानी नहीं देना है तो बोल दो इस तरह के अल्फाज़ क्यों बोल रही हो मेरी जान मैं तो तुम्हें ज़रा भी तकलीफ देना नहीं चाहता चलो तुम गुस्सा मत करो में खुद ही पी लेता हूं मेने कहा नहीं में यहां नहीं रहूंगी में कुछ दिन के लिए अपने मायके जा रही हूं फरहान मेरा लहज़ा देख कर चुप चाप बाहर चले गए मैं यही चाहती थी के फरहान मुझे मेरे मायके छोड़ दे ताकि मैं मुरीब से मिल सकूं फरहान मुझे मेरे मायके छोड़ आए अगले दिन मेने मुरीब को मैसेज किया और कहा मुरीब मैं तुमसे मिलने के लिए तय्यार हूं मुरीब ने मुझे hotel ki location भेज दी और कहा फेरिहा मैं तुम्हारा इस locatin पर इंतजार कर रहा हूं जब मैं उस होटल में पहुंची तो देखा वहां कोई नहीं था मेने मुरीब को मैसेज किया और कहा मुरीब तुम कहां हो होटल में तो कोई नहीं है मुरीब ने कहा फेरिहा तुम इंतजार करो में बस पहुंचने ही वाला हूं कुछ देर इंतजार के बाद जब मुरीब मेरे सामने आया तो मेरी आंखे फटी रह गई मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई क्यों के जो लड़का मुरीब बन कर मुझे मैसेज करता था वह कोई और नहीं बल्कि फरहान ही था...??



Sunday, June 30, 2024

شادی کے بعد آپ کو محسوس ہو سکتا ہے

 شادی کے بعد آپ کو محسوس ہو سکتا ہے کہ آپ کے شوہر کی محبت اور آپ کے ساتھ دلچسپی کم ہو گئی ہے اور مسائل اور پریشانیاں بڑھنے لگی ہیں۔ بعض اوقات یہ مسائل اتنے بڑھ جاتے ہیں کہ آپ کو لگتا ہے کہ تمام جذبات ختم ہو گئے ہیں اور رومانوی الفاظ کا کوئی مطلب باقی نہیں رہا۔ ان حالات میں آپ کا دل ٹوٹ سکتا ہے اور آپ کو مسلسل تنہائی اور محبت کی کمی کا احساس ہو سکتا ہے، چاہے وہ آپ کے پاس ہی کیوں نہ ہوں۔

🛑 اس لیے ہم آپ کو کچھ طریقے بتاتے ہیں جن کے ذریعے آپ دوبارہ اپنے شوہر کا دل جیت سکتی ہیں۔🛑

1. سچائی سے پیش آئیں : مرد اس عورت کو پسند نہیں کرتا جو اس سے کچھ چھپاتی ہو یا اسے بیوقوف بناتی ہو، چاہے وہ باتیں معمولی اور غیر اہم ہی کیوں نہ ہوں۔
 مثلاً، اگر آپ نے بچوں کی وجہ سے کوئی گھریلو کام مکمل نہیں کیا اور اسے یہ بتاتی ہیں، لیکن وہ حقیقتاً آپ کی دوست سے فون پر بات کرنے کی وجہ سے تھا، تو اسے سچ بتائیں۔
 کیونکہ اگر اسے آپ کے جھوٹ کا علم ہو جائے تو اس کا غصہ اور زیادہ ہو جائے گا۔

2. ذہانت کا استعمال : مرد اس عورت کو پسند کرتا ہے جو اس کی پسند اور ناپسند کو جانتی ہو اور اس کے مطابق کام کرتی ہو۔
 آپ کے ذہانت کا استعمال کرتے ہوئے اس کے دل تک پہنچنے کا طریقہ اسے پسند آئے گا اور وہ آپ کی ہر بات مانے گا۔

3. تعریفیں کرنا نہ بھولیں : ہمیشہ تعریف کرنے کی کوشش کریں تاکہ آپ اس کا دل جیت سکیں، جیسے اس کی خوش پوشاکی، اس کا انداز، اس کی سوچ وغیرہ کی تعریف کریں۔ 
یہ تعریفیں ہر وقت کریں اور کسی خاص لمحے کا انتظار نہ کریں۔

4. مزاح کا حس رکھیں : آپ اپنے شوہر کا دھیان اور محبت حاصل کر سکتی ہیں جب آپ ہنسنے ہنسانے والی ہوں۔
 مرد عام طور پر اس عورت کو پسند نہیں کرتا جو اداس رہتی ہو، کیونکہ وہ چاہتا ہے کہ اس کی بیوی اس کے مسائل اور ذہنی دباؤ کو کم کرے نہ کہ اس کے دکھ اور پریشانیوں میں اضافہ کرے۔

5. اپنی خوبیوں کو جانیں : اگر آپ کو لگتا ہے کہ آپ نے اپنے شوہر کی محبت کھو دی ہے تو یہ نہ سوچیں کہ آپ بری عورت ہیں جو محبت اور خوبصورت جذبات کی حقدار نہیں۔
 بلکہ اپنی خوبیوں کو جانیں اور انہیں نمایاں کریں تاکہ آپ کا شوہر انہیں دیکھے۔

6. جھگڑوں میں حکمت عملی اپنائیں : جب آپ کا اپنے شوہر سے اختلاف ہو تو اس سے سکون سے بات کریں اور عقلمندی سے کام لیں۔ 
اپنے خاندان کے مفادات کو ترجیح نہ دیں یا اس بات کی فکر نہ کریں کہ لوگ کیا کہیں گے۔
 بلکہ آپ کے لیے سب سے اہم بات یہ ہونی چاہیے کہ آپ اپنے شوہر کو خوش رکھیں اور اپنے مسائل کو کسی سے بھی، یہاں تک کہ اپنے والدین اور بہن بھائیوں سے بھی، شیئر نہ کریں۔
 کیونکہ عموماً آپ کا خاندان آپ کے ساتھ ہمدردی کرے گا اور شوہر کے حق پر آ جائے گا۔
 وقت گزرنے کے ساتھ آپ مسئلہ بھول سکتی ہیں، لیکن آپ کا خاندان اسے نہیں بھولے گا۔

ایک نوجوان تھا جس کی والدہ اس کی شادی سے دو ماہ قبل بیماری کی وجہ سے وفات پا گئی۔

ایک نوجوان تھا جس کی والدہ اس کی شادی سے دو ماہ قبل بیماری کی وجہ سے وفات پا گئی۔ اس نے اپنی شادی کی تاریخ ایک سال کے لیے مؤخر کر دی۔ شادی کے بعد وہ اپنے والد کو گھر میں اکیلا چھوڑ کر اپنی نئی زندگی گزارنے لگا کیونکہ اس کے والد کے علاوہ اس کا اور کوئی بہن بھائی نہیں تھا

پانچ سال سے زیادہ عرصہ تک وہ اپنی بیوی کے ساتھ اپنی نئی زندگی میں مگن رہا۔ وہ کبھی کبھار اپنے والد سے ملنے جاتا اور کبھی اس کی بیوی بھی اس کے ساتھ جاتی، لیکن کبھی وہ اپنے والد سے ملنے جاتا تو اس کی بیوی اپنے والدین کے گھر چلی جاتی۔ اس کی بیوی اسے مجبور کرتی کہ وہ اس کے والدین سے ملنے جائے، لیکن وہ اپنی بیوی کو مجبور نہیں کر پایا کہ وہ اس کے بیمار والد سے ملے۔

جب اس کا والد بیماری سے نڈھال ہو گیا تو بیٹے نے فیصلہ کیا کہ وہ اسے اپنے گھر لے آئے تاکہ وہ اس کی مکمل دیکھ بھال کر سکے۔ والد نے اس خیال کو قبول نہیں کیا کیونکہ وہ نہیں چاہتا تھا کہ اس کی بیوی کے سامنے وہ ایک ناپسندیدہ مہمان بنے۔ لیکن بیٹے کے اصرار پر والد نے اس کی بات مان لی اور اس کے گھر آ گیا۔

یہ بات اس کی بیوی کے دل پر بھاری تھی۔ وہ ایک ہی قسم کا کھانا پکاتی اور بیمار والد کے لیے کوئی الگ کھانا نہیں بناتی، اور اسے ان کے ساتھ ہی کھانے پر مجبور کرتی۔ وہ اس سے بدتمیزی سے پیش آتی اور اس کا شوہر اس بات پر الجھن میں پڑ جاتا کہ وہ اپنے والد کو راضی کرے یا اپنی بیوی کو۔

آخر کار، اس کی بیوی نے اسے مجبور کیا کہ وہ اپنے والد کی شادی کروا دے تاکہ کوئی اور اس کی دیکھ بھال کر سکے۔ جب بیٹے نے اس خیال کو اس کے والد کی عمر اور بیماری کی وجہ سے مسترد کر دیا، تو بات یہاں تک پہنچی کہ وہ اپنے والد کو ایک بزرگوں کے گھر لے جائیں گے تاکہ وہاں اس کی دیکھ بھال ہو سکے۔

بیٹا دل شکستہ ہو گیا جب اس نے اپنے والد کو بزرگوں کے گھر چھوڑا۔ ایک ہفتے بعد، اس نے اپنے والد سے ملنے کا فیصلہ کیا، لیکن وہاں پہنچ کر اس نے پایا کہ اس کا والد شدید ذہنی افسردگی کی وجہ سے وفات پا چکا ہے۔ اس نے اپنے بیٹے کے لیے ایک خط چھوڑا تھا جس میں لکھا تھا:

"میرے پیارے بیٹے، میں نے تمہیں اپنے آپ سے زیادہ محبت کی ہے۔ میری زندگی کے سب سے خوشگوار لمحات وہ تھے جب میں اپنے کام سے واپس آتا اور تمہارے لیے وہ کھلونا ٹرین یا مٹھائیاں لاتا جو تمہیں پسند تھیں۔ میری سب سے خوشگوار لمحات وہ تھے جب میں نے تمہیں تیرنا سکھایا، جب میں تمہیں اپنے کام پر لے گیا اور تم میرے کاغذات پھاڑ دیتے اور میں تمہاری مسکراہٹ دیکھتا۔

میری زندگی کے سب سے خوشگوار لمحات وہ تھے جب میں تمہیں اپنی جیب میں موجود ساری رقم دیتا تاکہ تم اپنی پسند کے کپڑے خرید سکو، اور میں خود اپنے پھٹے ہوئے جوتے میں ایک جگہ سے دوسری جگہ جاتا رہا۔

میں تمہیں ملامت نہیں کر رہا، بلکہ میں تمہیں لکھ رہا ہوں اور میرے آنسو خود پر افسوس میں بہہ رہے ہیں۔ میں نے کبھی نہیں سوچا تھا کہ میری زندگی کا اختتام تمہاری گود میں نہ ہو، اور تم میری آخری رسومات ادا نہ کرو۔

میں تم سے محبت کرتا ہوں اور اب بھی کرتا ہوں... تمہارا وفادار والد۔

اگر تمہاری شادی ایسی لڑکی سے ہو تو اس کے سامنے اپنے والدین کی قیمت پر کمزور نہ ہو۔ اور اگر تمہارا شوہر تمہیں اپنے خاندان سے دور کرتا ہے تو اس کے سامنے اپنے والدین کی قیمت پر کمزور نہ ہو۔

ہمیں قیمتی جواہرات کی قدر تب ہی آتی ہے جب ہم انہیں کھو دیتے ہیں۔ کتنا مشکل ہے جب آپ کسی کو پیغام دینا چاہتے ہیں اور وہ آپ کو سن نہیں سکتا، نہ کہ وہ آپ کو نظرانداز کر رہا ہو بلکہ اس لیے کہ وہ دنیا سے رخصت ہو چکا ہے۔

ہمارے محنت کو ضائع نہ کریں، آپ کے ساتھ ہم ترقی کرتے ہیں، آپ کے ساتھ ہم بڑے ہوتے ہیں، اور آپ کے ساتھ ہماری خوشی مکمل ہوتی ہے۔ ان ذہین عقلوں کا شکریہ جو ہمارے ساتھ ہیں۔"

Saturday, June 29, 2024

ہوٹل کے کمرے میں محبت کا حق ادا

ہوٹل کے کمرے میں محبت کا حق ادا کرنے کے بعد لڑکا اور لڑکی برہنہ حالت میں لیٹے محبت کی باتیں کررہے تھے.... لڑکا جانوں یہ لمحے بہت قیمتی ہیں چلو ایک وڈیو بناکر ان کو یادگار کے لئے قید کرلیتے ہیں.... لڑکی نہیں جان ایسے مت کرو تم وڈیو لیک کردو گے لڑکا تمہیں مجھ پر شک ہے؟ جان تمہیں میری قسم ایک وڈیو بنانے دو تمہارے سر کی قسم ڈلیٹ کردوں گا...
لڑکی جان تم سر کی قسم مت دیا کرو, چلو بنالو.

‏عزت ہوٹل کے کمرے میں نیلام کرکے وہ محبوب کی یادوں میں اُڑتی گھر آکر سوگئی...
 یادرہے وہ گھر سے سہیلی سے ملنے کا بہانہ لگاکر گئی تھی...
صبح جب وہ اُٹھی تو اُسکی وہ برہنہ وڈیو انٹرنیٹ پر وائرل ہوچکی تھی...
بھائیوں نے اُسی وقت مارکر دفن کردیا....
لوگوں کو بتایا اُسے سر درد ہوا اور وہ مرگئی...
ایسی لڑکیوں کو بغیر جنازے کے راتوں رات لاوارثوں کی طرح دفنا دیا جاتا ہے....
یہ کوئی کہانی نہیں ہے ایک سچ ہے جو ناجانے کتنی لڑکیوں کے ساتھ ہوچکا ہے.....
اے بنتِ حوا گاڑیوں میں گھومنا مہنگے تحفے لینا آئی فون لینا...
ہوٹلوں میں محبوب کے ساتھ کھانے کھانا تمہیں یہ دنیا بہت اچھی لگتی ہوگی....
پر یاد رہے یہ ایک بھیانک دنیا ہے. اس کا انجام ذلت اس کے بعد قتل اور بغیر جنازے کے تدفین ہے...!!!!

‏بنتِ حوا آپ کے بابا نے زمانے کی خاک چھان کر آپ کو جوان کیا ہے...
 آپ کو تعلیم دلوائی کسی قابل بنایا اُس باپ کی عزت کا کچرہ محبت کی آڑ میں مت کرو...
اس دنیا میں سب مل جاتا ہے پر گئی عزت دوبارہ نہیں ملتی.....
سنبھل جاؤ اس سے پہلے کہ لاوارث موت تمہارا مقدر بنے.

Saturday, June 22, 2024

اُس شخص سے کنارہ کرلو

اور اُس شخص سے کنارہ کرلو ۔۔۔ جو تُمہیں اپنی مرضی کے مطابق محّبت دے ۔۔۔۔
یعنی جب چاہے محبت کا احساس دلائے اور جب چاہے اجنبی کر دے ،✨
محبت موڈ پہ انحصار نہیں کرتی ۔۔۔ موڈ اچھا ہے تو محبت ہے ۔۔۔ موڈ اچھا نہیں تو محبت نہیں ۔۔
جو شخص تمہیں اپنے موڈ اور اپنی زندگی میں چل رہے حالات کے مُطابق محبت کرے ۔۔۔ اُس سے کنارہ کرنے کے سوا اور کوئی بہتر راستہ نہیں 💔

Friday, June 21, 2024

‏میرا دل چاہتا ہے

‏میرا دل چاہتا ہے..
 میرا ایک ایسا گھر ہو....
 جسکے چاروں طرف میلوں تک ۔۔۔۔۔
کوئی انسان نہ بستا ہو، اور نہ کوئی شور شرابہ ہو
اتنی خاموشی ہو کہ پھول کھلنے کی آہٹ بھی آئے، 
آوازیں ہوں تو پرندوں کی،۔۔۔۔
 بارش کی پتوں پہ گرنے کی، ۔۔۔
ہوا کی سرسراہٹ اور تتلیوں کے پروں کی ہوں ۔۔۔۔۔۔، 
چاند صرف مجھ سے بات کرے
 اور ستارے جھلمائیں۔۔۔۔۔۔۔
!!!!!! مجھ سے کبھی کوئی ملنےنہ آئے!

شادی کے بعد میاں بیوی کا ایک دوسرے سے دل کیوں اکُتا جاتا ہے۔؟

شادی کے بعد میاں بیوی کا ایک دوسرے سے دل کیوں اکُتا جاتا ہے۔؟

اگرچ نکاح دنیا کا سب سے انمول تحفہ ہے تو کیوں آج کل لوگ اس رشتے کو نبھا نہیں پا رہے؟
کیوں وہ جیون ساتھی ہونے کے باوجود کسی اور شخص کو اپنی زندگی میں لے آتے ہیں؟
کیوں اپنے جیون ساتھی سے اُکتاہٹ ہو جاتی ہے؟
کیوں آہستہ آہستہ غلط فہمیاں رشتے کو کھوکھلا کر دیتی ہیں۔ کیوں اتنا قریب ہو کر انسان اتنا دور ہو جاتا ہے؟
اس پہ بہت سے لوگوں نے رائے دی ہے۔ میں تھوڑا اس پہ روشنی ڈالنا چاہوں گا، کے کس طرح آپ اپنی زندگی کو آسان بنا سکتے ہیں۔ 

1:-👈 شادی سے پہلے آج کل مرد اور عورت کی زندگی میں پہلے سے ہی کوئی اور شخص ہوتا ہے۔ جو کہ کسی وجہ سے زندگی میں نہیں آتا، جس کی وجہ نکاح کہیں ہو جاتا ہے اور جیون ساتھی کو وہ مقام نہیں ملتا، جو ملنا چاہیئے۔ 

2:-👈 اپنے جیون ساتھی کو کسی اور سے کمپیئر کرنا اور سوچنا کہ اس میں یہ خامی ہے، یہ برائی ہے اور پھر اس کی خامیوں کے خلاف ہو جانا گھر کی بربادی کا سبب بنتا ہیں۔
 
3:-👈کسی تیسرے شخص کی انوالمنٹ یعنی اپنی شادی شدہ زندگی میں کسی تیسرے شخص کو لے آنا۔ اس کی باتیں سُننا، اس کو وقت دینا۔ مکمل اگنور کرنا، یہ محسوس کروانا کہ بس تمہاری زندگی میں میری کوئی ویلیو ہی نہیں۔ اس کے بعد مرد اور عورت کو تیسرا بندہ اچھا لگنے لگ جاتا ہے۔
 
4:-👈چھوٹے چھوٹے مواقع پہ جیون ساتھی کو وش نا کرنا۔ یا اگر ایک شخص بالکل سادہ ہو تو اس کی سادگی کا مزاق اڑانا کہ دنیا یہاں پہنچ چکی ہے اور تمسخر اڑانا۔ 
 اپنے جیون ساتھی کو وقت نا دینا، اس کا حال نا پوچھنا، ایسے رویہ سے بغاوت کا آغاز ہو جاتا ہے۔ 

5:-👈اگر شوہر خستہ حال ہو تو بات بات پہ اس کو طعنہ دینا کہ میرے گھر یہ تھا، یہ وہ تھا۔ یا میرا نصیب خراب کہ تم سے شادی ہو گئی۔ بے جا خواہشات شوہر کا خیال نا رکھنا، اس کے لئے سجنا سنورنا نہیں۔ اپنے آپ کو بس یہ سمجھنا کہ اب بوڑھے ہو گئے ہیں۔ 

6:-👈 نکاح کے بعد مرد اور عورت ایک دوسرے کا لباس ہوتے ہیں۔ عورت کو پتا ہونا چاہیئے کہ اس کے شوہر کے کتنے وسائل ہیں۔ اس کی تکلیف پریشانی میں اس کو اس بات کا یقین دلوایا جائے کہ میں آپ کے ساتھ ہوں۔ 

7:-👈حد سے زیادہ اُمیدیں کبھی اپنے جیون ساتھی سے نہیں لگانی چاہیئے۔ اس کی چھوٹی چھوٹی غلطیوں کو نظر انداز کرنا چاہیئے۔ سب کے سامنے تذلیل کرنے سے دوریاں جنم لیتیں ہیں۔ 

8:-👈 کبھی کبھی پیار کا اظہار کر لینا چاہیئے۔ اگر ہو سکے تو دن میں ایک دفعہ ضرور اس کا حال پوچھنا چاہیئے۔ اگر غلطی ہو جائے تو اس پہ سب کے چیخنے چلانے کی بجائے اس کو پیار سے سمجھنا چاہیئے۔ نا کہ سب کے سامنے تماشہ بنانا چاہیئے۔
 
9:-👈جو کچھ ہم اپنے بوائے فرینڈ یا گرل فرینڈ کے ساتھ کرنا چاہیتے ہیں۔ وہ خواب ہم اپنے حلال رشتے کے ساتھ پورا کر سکتے ہیں۔ اگر کہیں گھومنے جانا ہو تو اپنی وائف کے ساتھ جا سکتے ہیں۔ کہیں پہ کھڑے ہو کر آپ کچھ بھی کھا سکتے ہیں، کوئی آپ کو اعتراض نہیں کرے گا۔
 
10:-👈 زندگی نام کمپرومائز کا ہے، کوئی بھی پرفیکٹ نہیں ہوتا۔ جو چیز ہمیں نہیں ملتی، ہم اس کی طلب کرتے ہیں اور جو مل جاتی ہے، اس کی قدر نہیں کرتے۔ تعریف کے کچھ کلمات آپ کے جیون ساتھی کو آپ کا غلام بنا سکتے ہیں۔

عمل کرنے کی کوشش کریں 
يوسف عظيم خان

Monday, June 10, 2024

دو گھڑی مانگی

دو گھڑی مانگی جہاں جینے کی فرصت ہم نے
زندگی کو یہ لگا ، کی ہے شکایت ہم نے

جس سے لڑتے ہیں اسے آپ منا لیتے ہیں
خوب بدلی ہے ترے بعد یہ عادت ہم نے

جانے کیا حال ترے بعد ہوا ہو اپنا
تیرے جاتے ہی کیا خود کو بھی رخصت ہم نے

ایک ہی شخص پہ موقوف جہاں کیا کرنا
دل کو بہکایا بہت ، لاکھ کی منت ہم نے

کٹ گئے یونہی ترے ہجر میں سب ماہ و سال
ایک صورت کے سوا دیکھی نہ صورت ہم نے

یونہی الزام نہ دے دیکھ بھلے یاروں کو
کسی ناصح کی سنی کب ہے نصیحت ہم نے

بیچ آتی ہیں ہمیں روز ہماری سانسیں
اپنے ہونے کی چکائی بڑی قیمت ہم نے

ایک دنیا ہمیں پہلے بھی یہاں جانتی تھی
بس ترے غم ہی سے پائی نہیں شہرت ہم نے

اپنے حالات پہ ہنستے ہیں بہت ہنستے ہیں
کیسی کم ظرف یہ پائی ہے طبیعت ہم نے

حادثے زخم بھی دیتے ہیں سبق بھی ابرک
ایک ہی شخص سے پکڑی بڑی عبرت ہم نے

Friday, March 29, 2024

سچی تحریر‏


‏بہت سے لوگ مجھے میسج کرتے ہیں کہ آپ وہ لکھتے ہیں جو ہم سوچتے ہیں ہم پہ بیتی ہوتی ہے یا بیت رہی ہوتی ہے دراصل میں وہی لکھتا ہوں جو میرے اوپر بیت رہی ہوتی ہے تجربہ اور سوچ ہے جو کہ فطرت کے عین مطابِق ہے ہم میں سے بہت سے لوگ اس حال میں سے گزر رہے ہوتے ہیں اس لئے سب خود کو میری تحریر سے جوڑ لیتے ہیں میں نے جب جب لوگوں سے اُمیدیں لگائیں، میری اُمیدوں کو مایوسی کے کیڑے بن کے چاٹ لیا۔ اب میں نے فیصلہ کیا ہے کہ سمجھ بوجھ کے سنیٹائیزر  سے اُس مایوسی کے کیڑوں  کا سِرے سے ہی خاتمہ کر ڈالوں گا ‏مجھے زندگی میں کبھی کوئی رشتہ ایسا نہیں ملا جو میری مرضی سے میرے ساتھ چلے میرے دکھ کو سمجھے  ہمشیہ مجھے وہ رشتے ملے جو میرے پہ حکومت کرتے اور میں ہمشیہ کی طرح غلام بننے کا عادی
 اللہ نے میرے اندر یہ حساس اور محبت کا جزبہ کیوں بھر دیا؟؟
یہاں پھر مجھے بےفیض دنیا سے ہی ملتا کبھی بھی میں چاہتا ہوں مجھے الفاظ کے بغیر سمجھا جائے __ 
میری خاموشی محسوس کی جائے میری ہنسی کے  اندر کے غم کو اور میری آنکھ کی نمی دیکھ کر میرے دل کا حال جانا جائے ہاں میں چاہتا ہوں مجھ سے ایسی محبت کی جائے کیونکہ میں واجب المحبت ہونا چاہتا ہوں 
‏زید میرا دوست اک واحد بازو جو ہر وقت ہمارے گِرد لپٹ کر ہمیں گلے سے لگا لیتا تب یہ احساس ہوتا وہی سب کچھ  ہے جب ہم کمزور پڑ چُکے ہوتے اور سلام ہے ان  کی آنکھوں کو جو اُس وقت بھی ہم کو چاہے جب دُنیا کی بدصورتیاں ہم پر چھا چُکی ہوں اور عظیم ہے زید کا دل جو تب بھی ہم سے محبت کرتا رہے جب ساری دُنیا کی زمین تم پر تنگ ہو چکی ہو

✍یوسف عظیم خان 



عشق ‏کرتا ہوں

وہ جانتی تھی میں اس سے محبت نہیں عشق کرتا ہوں،۔۔ بے پناہ عشق،
وہ جانتی تھی وہ میری کمزوری بن چکی ہے،
کبھی کوئی بات نہیں بھی ہوتی تھی تو وہ لڑ کر خفا ہوجاتی تھی، تو پاگل سا ہو جاتا تھا میں۔
بات بات پر آنسو ٹوٹ کر گرنے لگتے تھے،
اس کی ناراضگی میرا اس دنیا سے دل اچاٹ کر دیتی تھی،
ہر چیز سے واقف ہوتے ہوئے بھی اس نے میری زندگی کو ہمیشہ ہمیشہ کے لیئے درد سے بھر دیا،
نہ جیتا ہوں نہ مرتا ہوں، بس خالی ذہن کے ساتھ زندگی گزارے چلے جا رہا ہوں، اس کی محبت کو میں اپنی مضبوط پناہ گاہ سمجھتا رہا، لیکن اس نے سب کچھ چھین لیا مجھ سے، خوشی کا ہر احساس ہر وجہ، اور میری زندگی کو ہمیشہ کے لیئے اندھیروں  کے حوالے کر دیا۔
یوسف عظیم خان

Yeh dil hamesha bana kaise rahe

Koi ek ...
Sochta tha kisi ek pe yeh dil hamesha bana kaise rahe?
Ye nadaan man bhala kisi ek se kaise bhare?
Mil gayi hai Saathi, yeh usi din se baar baar mujhse kahe.
Tumhare siwa kisi aur se dil ab judne se hi rahe!
Saare nakhre bhool, bas tumhari tareefein karne ka kabhi
kabhi yeh dil kare
Kaise bataun ki tumhare ek muskaan se mera din kaise
bhare?
Iss muskaan ke liye toh apni khushiyaan bhi tumhari
chaukhat par de auun,
Kaash ek din tumhari Haathon ki Mehndi mein apna naam
bhi dhoond paun!!

Yousuf Azim Khan ✍️

ﻣﺤﺒﺖ ﮐﻮ ﺁﺯﻣﺎﻧﮯ ﮐﯿﻠﺌﮯ ﺟﺴﻢ کا ﻣﺎنگنا

ﻣﺤﺒﺖ ﮐﻮ ﺁﺯﻣﺎﻧﮯ ﮐﯿﻠﺌﮯ ﺟﺴﻢ  کا ﻣﺎنگنا

ﺟﻮ ﻟﮍﮐﺎ ﮐﺴﯽ ﻟﮍﮐﯽ ﮐﯽ ﻣﺤﺒﺖ ﮐﻮ ﺁﺯﻣﺎﻧﮯ ﮐﯿﻠﺌﮯ ﺍﺱ ﻟﮍﮐﯽ ﺳﮯ ﺛﺒﻮﺕ ﮐﮯ ﻃﻮﺭ ﭘﺮ ﺟﺴﻢ ﻣﺎﻧﮕﺘﺎ ﮨﮯ ﺗﻮ ۔۔۔۔
ﺍﺱ ﻟﮍﮐﯽ ﮐﻮ ﭼﺎﮨﯿﺌﮯ ﻭﮦ ﺍﺱ ﻟﮍﮐﮯ ﺳﮯ ﮐﮩﮯ ﮐﮧ ﭘﮩﻠﮯ ﺗﻢ ﻣﺠﮫ ﺳﮯ ﺳﺐ ﮐﮯ ﺳﺎﻣﻨﮯ ﻧﮑﺎﺡ ﮐﺮ ﮐﮯ ﺍﭘﻨﯽ ﻣﺤﺒﺖ ﺛﺎﺑﺖ ﮐﺮﻭ ﭘﮭﺮ ﻣﯿﮟ ﺳﺎﺭﯼ ﺯﻧﺪﮔﯽ ﮐﯿﻠﺌﮯ ﺍﭘﻨﺎ ﺟﺴﻢ ﺍﻭﺭ ﺭﻭﺡ ﺻﺮﻑ ﺍﻭﺭ ﺻﺮﻑ ﺗﻤﮩﯿﮟ ﺳﻮﻧﭗ ﮐﺮ ﺍﭘﻨﯽ ﺟﺎﺋﺰ ﺍﻭﺭ ﺳﭽﯽ ﻣﺤﺒﺖ ﺛﺎﺑﺖ ﮐﺮﻭﻧﮕﯽ۔۔ﺍﻭﺭ ﺟﻮ ﻟﮍﮐﺎ ﯾﮧ ﺑﺎﺕ نہ ﮐﺮﮮ ﻭﮦ ﮐﺴﯽ ﻃﻮﺭ ﭘﺮ ﮐﺴﯽ ﻃﺮﺡ ﺳﮯ ﺑﮭﯽ ﺳﭽﺎ ﻧﮩﯿﮟ ﮨﮯ ﺟﮭﻮﭨﺎ ﮨﮯ ﮈﺭﺍﻣﮧ ﮨﮯ ﺍﯾﮏ ﺑﺲ۔۔ﺟﻮ ﺍﭖ ﺳﮯ ﻣﺤﺒﺖ ﮐﺮﮮ ﮔﺎ ﮨﻤﺸﮧ ﺍﭘﮑﻮ ﭘﺎﮐﯿﺰﮦ ﺭﮐﮭﮯ ﮔﺎ""""""
ﺭﻭﺡ ﺳﮯ ﭼﺎﮨﻨﮯ ﻭﺍﻟﮯ ﻋﺎﺷﻖ
ﺑﺎﺕ ﺟﺴﻤﻮﮞ ﮐﯽ ﮐﺮﺗﮯ ﻧﮩﯿﮟ;;;;;

جس کو کڑوا لگے برائے مہربانی و کمنٹس_نہ_کرے

تحفہ لڑکیو ں کے لیے
اس لیے کے کسی 1 بہن نے بھی اپنی عزت کی حفا ظت کر لی تو کم سے کم 1 تو نہ لٹے گی کسی درندے کے ہاتھوں ۔۔۔۔۔؟


Mohabbat Aur Jannat ka darwaza

Mohabbat Aur Jannat Ka Darwaza


Feriha ek cousin se pyar karti thi jo wo kisi ko batati nahin thi uska nam wahid tha wahid uski door ki khala ka beta tha feriha k bhai aur wahid me bahut achchi dosti thi is dosti k beech me mohabbat ake darar ban rahi thi jo feriha ko nahin mlm tha wahid usi shaher me ek hostel me raheta tha jahan feriha ki family raheti thi wahid ek din bahut beemar hogaya wahid ka koi yahan nahin tha to feriha k bhai hasan ko maloom pada ki wahid bahut beemar hai to usko le aya apne ghar wahid ko hasan ki ammi dekhi to bhut khush hui aur bahut achche se khyal rakhi uska wahid kuch din wahan tha
phr wapis chala gaya apne hostel hasan ki ammi wahid ko kabhi kabhi bulati thi bolti thi ki beta ye bhi tumhara ghar hai tum apna samjh m aya karo wahid ne bola haan zaroor aunga wo ata tha wahid apne college ke dosto ke saath zyada waqt guzarta tha hasan ki ammi usko apna family member samjh k samjhati thi beta jab free raha karo to mere yahan a jaya karo dosto me zyada mat raha karo to wahid unki baat bahut manta tha wahid zyada waqt yahin guzarne laga tha 

phr achanak se wahid ka accident ho gaya wahid aya hasn k ghar pe to hasan school gaya hua tha hasan ki ammi gahera zakham nahi dekh sakti thi wo dekh k dar gai feriha ko bulai feriha aai usko boli saf karo dekho kafi chot agai wahid ko marham patti karo dodh me haldi lao pilao feriha se phr thodi der baad uski ammi mazaq ki tum beta apne bhai ko kabhi aise nahi ki kya baat wo hasi aur boli ammi aap bhi wahid bhi sharma gaya feriha ki ammi bahut mazahiya thi feriha phr usi din se feriha thoda free ho gai mazaq karne lagi hasan school se ghar aya dekha wahid ka ye hal to wo bahut chillaya ammi main isko samjhta raheta hoon lekin ye nahin samjhta wahid bhi chup chap sun raha tha q ki wahid aur hasn ek dost hi nahin cousin bhi thi hasn thoda bada tha wo dat bhi deta wahid khishi khushi sun leta wahid Hasan itne khas dost the ki dono k beech kuch chupa nahin tha wahid college me padhta tha to wo college me bahut sare dost banaya tha aur ladkiyon me bhi bahut sari dost thi 
wahid jab kisi apni dost se baat kare to hasan k samne hi kare hasan bole bhai yar kitne log se baat karte hue inhi beech ek nai ladki Zoha nam se message ki to hasan ne dekh bola bhai ek kam karo tum college me busy rahete ho tum apna account mujhe dedo main baat karoon hasan kuch ek do din baat kiya to shayed usko malm pad gaya ki wo zoha kaun hai phr wahid ko uska account wapis kardiya bola bhai main block kardiya tum bhi baat mat karo wahid socha aisi kya baat ho gai phir se wo kabhi kabhi baat kare ek din aisa hua hasan aur uski family gaon jarahe thi shadi me to wahid bhi akela ho gaya wahid ke college band tha wo akele boriyat k liye mobile chala raha tha 

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Yousuf Azim Khan ✍️

Duniya Ki Mohabbat

Duniya k samne akad kar chalne wala yousuf 
Jhuk kar tere qadmo me gir sakta hai

انسان کی طاقت اور علم ‏

انسان کی طاقت اور علم 

کیا ایسا ممکن ہے کہ آپ اپنے دماغ سے کسی کو بھی پیغام پہنچا سکے۔ کیا ایسا ممکن ہے کہ آپ جب چاہیں کسی کی بھی خواب میں جا کر اپنے دل کی بات کہہ سکے۔ کیا ایسا ممکن ہے کہ آپ کسی بھی انسان کو اپنے وجود کا احساس دلاتے رہے جب کہ وہ آپ سے رابطے میں نہ ہو۔کیا ایسا ممکن ہے کہ آپ کسی کے دماغ کو قابو کر سکو۔کیا ایسا ہوسکتا ہے کہ آپ اپنے دماغ کو قابو میں کر کے الیکٹرونکس اشیاء کو بغیر بجلی کے چلا سکتے ہیں  تو اس کا جواب ہے جی ہاں  ایسا بالکل ممکن ہے۔ 
اس علم کو ٹیلی پیتھی کا نام دیا جاتا ہے یہ ایک ایسا علم ہے جس پر کوئی بھی شخص عبور حاصل کر لے  تو وہ بغیر کسی بھی سہارے کے اپنے دماغ کی مدد سے کسی بھی شخص سے رابطہ کر سکتا ہے۔ پھر چاہے وہ شخص دنیا کے کسی بھی حصے میں موجود کیوں نہ ہو۔ اس علم کو دوسرے ناموں سے بھی جانا جاتا ہے۔ جیسا کہ تیسری آنکھ یا باطنی انکھ کا کھل  جانا۔  -

نوجوانوں اپنے گھر والوں پے دباؤ ڈالوں کے اپ کی جلدی شادی کریں‏

نوجوانوں اپنے گھر والوں پے دباؤ ڈالوں کے اپ کی جلدی شادی کریں تاکہ اپ لوگ اس فتنہ کے زمانے میں گناہوں سے بچ سکو رزق مقرر ہے رزق سب کو اللّه دیتا ہے 

لڑکے اور لڑکیوں کی شادی میں دیری کا بڑھتا ھوا خطرناک رجحان؛

👌 ایک لمحۂ فکریہ👌

آج سے تقریبًا پندرہ سال پہلے معاشرے کا جو رجحان تھا، اس کے مطابق جس لڑکی کی شادی پچیس سال کی عمر سے پہلے کر دی جاتی، تو ایسی شادی کو بروقت گردانا جاتا۔
 پچیس سال کی عمر کا ھندسہ عبور کرنے کا یہ مطلب لیا جاتا کہ لڑکی کے رشتہ میں دیر ھو گئی ھے.....

♢♢اس سے پہلے کا معلوم نہیں لیکن ھو سکتا ھے کہ دیری کا یہ پیمانہ تین چار سال پہلے تصور کیا جاتا ھو...

پھر سات آٹھ سال پہلے یہ صورتحال ھوئی کہ تیس سال کی عمر سے پہلے پہلے لڑکی کی شادی بروقت قرار دئے جانے لگی۔ یعنی محض سات آٹھ سال میں پانچ سال کا فرق آ گیا۔

اب بھی ایسے معاملات ھیں کہ اکثر گھروں میں لڑکیوں کی عمریں تیس سے چالیس سال کے درمیان ھو چکی ھیں لیکن رشتہ " ندارد

یہ رشتہ میں دیری کا رجحان ھمارے معاشرے میں ایسی خاموش دراڑیں ڈال رھا ھے جو معاشرتی ڈھانچے کے زمین بوس ھونے کا پیش خیمہ ھیں۔
لیکن حیف کہ اس کا عملی ادراک معاشرے کے چند لوگوں کو بھی نہیں۔

آئیں! اس دیری کی وجوھات کا تعین کرنے کی کوشش کرتے ھیں،،،،

       🔸 پہلی وجہ🔸

 لڑکوں کا تعلیم کے میدان میں پیچھے رہ جانا اور لڑکیوں کا اس میدان میں آگے نکل جانا ھے،،،،
پچھلے کئی سالوں کے بورڈ کے امتحانات کے نتائج اس بات کے شاھد ھیں،،،
اس کی وجہ سے تعلیم کے لحاظ سے ھم پلہ رشتہ ملنا انتہائی مشکل ھو چکا ھے۔
شہروں میں کچھ سالوں سے لڑکیوں میں بڑھتے ھوئے "پی. ایچ. ڈی" کے رجحان نے اس کو اور مشکل بنا دیا ھے۔

 🥀دوسری وجہ🥀

 اچھی تعلیم حاصل ھونے کی وجہ سے لڑکیوں کو روزگار کے مواقع نسبتًا آسانی سے مل جاتے ھیں،،،،،
اس کے دو اثرات سامنے آئے ھیں؛؛

▪ پہلی▪

 والدین کا ان لڑکیوں پر مالی انحصار کرنا شروع ھو جانا،،،
 دوسری
نوکریوں کے لحاظ سے ھم پلہ رشتے نہ ملنا۔

💥 تیسری وجہ💥

 کچھ والدین کا اس معاملہ میں بالکل ھل جل نہ کرنا ھے،،
 لڑکیوں کی عمریں اٹھائیس اٹھائیس سال ھو جاتی ھیں لیکن انھیں کم عمر ھی تصور کیا جاتا ھے۔

♧♧ ایک زمانہ تھا کہ اٹھارہ بیس سال کی عمر میں مائیں رشتوں کی تلاش میں سرگرداں ھوجایا کرتی تھیں۔
🌹 یہ رجحان، *الحمد للہ* دینی گھرانوں میں اب بھی بدستور موجود ھے جو کہ ازحد ضروری ھے۔

🔺 چوتھی وجہ🔺

 جس لڑکی کی عمر تیس سال سے اوپر ھو جاتی ھے اس کے لئے عمر کے لحاظ سے رشتے مشکل ھو جاتے ھیں کیونکہ اکثر لڑکے والے کم عمر لڑکی کی تلاش میں ھوتے ھیں،،،

🔹 پانچویں وجہ🔹

 لڑکے والوں کے از حد نخرے ھیں،،،
 اول تو کوئی لڑکی، لڑکے کی ماں بہن کو بھاتی نہیں، فقط کھانے پینے سے لطف اندوز ھونا ھی شاید مقصد ھوتا ھے۔
اگر کوئی لڑکی پسند آ بھی جائے تو پھر فرمائشوں اور رسوم و رواج کے نام پر لڑکی والوں کا مکمل استحصال کیا جاتا ھے۔

ھمارے ایک ایسے دوست ھیں جن کے گھر والوں نے بیاسی جگہ ان کا رشتہ دیکھا، پھر ایک جگہ ھاں کی،

کچھ عرصہ بعد وھاں سے رشتہ توڑنے لگے تو اس دوست نے انکار کر دیا کہ میں مزید تماشا نہیں دیکھ سکتا..

▪ چھٹی وجہ▪

 شہروں میں ایک عجیب وجہ سامنے آئی ھے؛
 لڑکی کے والدین، لڑکے میں وہ تمام کامیابیاں دیکھنا چاھتے ھیں جو پچاس سال کی عمر میں حاصل ھوتی ھیں۔

 مکان🏘 اپنا ھو،
گاڑی🚘 پاس ھو،
تنخواہ کم از کم اتنی ھو وغیرہ وغیرہ۔

 🍃 ساتویں وجہ🍃

 خاندانوں کے اندر ایک عجیب و غریب وجہ دیکھنے میں آ رھی ھے۔ ھر ماں اپنی بیٹی کا رشتہ خاندان میں بخوشی کرنے پر راضی ھے لیکن جب اپنے بیٹے کا معاملہ آتا ھے تو خاندان کی سب لڑکیوں پر ناک بھوں چڑھا لیا جاتا ھے اور بڑے طمطراق اور فخر سے خاندان سے باھر کی لڑکی لائی جاتی ھے۔

●●اس کے علاوہ مزید وجوھات بھی ھوں گی۔

وجوھات جو بھی ھوں لیکن یاد رھے کہ اس سے ھمارا معاشرتی نظام درھم برھم ھو رھا ھے۔ اور ھماری نوجوان نسل، بروقت شادی نہ ھونے کی وجہ سے، میڈیا کی پھیلائی ھوئی، بے حیائی کا بآسانی شکار ھو رھی ھے۔ اور جو محفوظ ھے، وہ اپنے ساتھ ایک خاموش نفسیاتی جنگ کا شکار ھے۔

 مغرب تو اس طرز سے اپنے آپ کو برباد کر چکا اور ان کی آبادی اب ریوَرس گیئر میں چل رھی ھے لیکن ھم جانتے بوجھتے خود اس گڑھے میں گر رھے ھیں اور وہ بھی ھنستے مسکراتے۔

 اور ھم سب اس اجتماعی خرابی اور زوال کے ذمہ دار ھیں۔

 صد افسوس!
 کشتی ڈوب رھی ھے اور کشتی کے ملاح اور مسافر بے نیاز۔

حَیراں ھوں،،،،
 دل کو روؤں
 کہ،،
پیٹوں جگر کو میں!!!!
۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔
 اگر ھم نے بچوں کی بلوغت کے فورًا بعد شادی کو رواج نہ دیا،
اگر ھم نے دوسری، تیسری اور چوتھی شادی کو لعنت سمجھنے کے کفر سے توبه نہ کی،
اگر ھم نے مطلقہ خواتین اور بیواﺅں کی فوری اور آسان شادیوں کا بندوبست نہ کیا،
اگر ھم نے نکاح کو کاروبار کے بجائے فرض کا درجہ نہ دیا،
اور جتنا کہ نہا دھو کر مسجد میں جا کے جمعہ پڑھنا آسان ھے، اسے بھی اتنا ھی آسان نہ بنایا،

اگر ھم نے زنا کی طرف جانے والے راستوں کا سدباب نہ کیا، اور اسے موجودہ حالات میں اتنا ھی مشکل نہ بنایا جتنا کہ دوسری شادی مشکل ھے،

تو ریپ کے مجرم دندناتے رھیں گے، 

جبکہ بغیر اجازت دوسری شادی والے سلاخوں کے پیچھے ھوں گے۔!!!
تو گھروں میں بیٹیوں کے لئے رشتوں کی بجائے دوستی کے پیغام آیا کریں گے۔!!!

تو بیٹیاں پھولوں سے سجی گاڑی میں حجلہ عروسی کی بجائے تاریک شیشوں والی کار میں ڈیٹ پر جایا کریں گی۔!!!
تو بیٹے شادیوں کی بجائے افیئرز اور بیویوں کی بجائے گرل فرینڈز رکھا کریں گے۔!!!

تو شوھر اپنے دفتروں میں معاشقے چلاتے رھیں گے۔!!!
اور نیو ایئر نائٹ، ویلنٹائین ڈے، ھیلوئین اور چاند رات جیسے تہوار جنسی ھوس کی تسکین کی علامات بنے رھیں گے۔!!!

واللہ یہ آگ ھر اس گھر میں پہنچے گی جو دین فطرت کے اٹل قانون سے منہ موڑے گا اور وہ وقت آ کر رھے گا جب اس "مقدس" سرزمین پر بھی ولدیت کے خانے میں لکھا نام مشکوک ھو جائے گا۔
(نعوذباللہ من ذالک)

کچھ سمجھ کر ہی ہوا ہوں موجِ دریا کا حریف ورنہ میں بھی جانتا ہوں عافیت ساحل میں ہے

​ کچھ سمجھ کر ہی ہوا ہوں موجِ دریا کا حریف ورنہ میں بھی جانتا ہوں عافیت ساحل میں ہے